Wednesday, October 12, 2016

श्री रामचरितमानस में नवधा-भक्ति Navadha Bhakti In RamcharitManas

श्री रामचरितमानस में नवधा-भक्ति 

प्रथम भक्ति संतन सत्संगा | 
दूसर मम रति कथा प्रसंगा ||

गुरु पद पंकज सेवा, तीसरी भक्ति अमान |
चौथी भक्ति मम गुन गन, करहीं कपट तजि गान ||

मंत्र जाप मम दृढ विश्वासा |
पंचम भजन सो वेद प्रकाश ||
छठ दम शील विरति बहु करमा |
निरत निरंतर सज्जन धरमा ||

सातवँ सम मोहिमय जग देखा |
मोते संत अधिक करि लेखा ||

आठवं यथा लाभ संतोषा |
सपनेहुँ नहीं देखई पर दोषा ||

नवम सरल सब सन छल हीना |
मम भरोस हियँ हरष न दीना ||

नवम हूँ एकउ जिनके होई |
नारी पुरुष सचराचर कोई ||

सोई अतिसय प्रिय भामिनी मोरे |
सकल प्रकार भगति दृढ तोरे ||
                            
                                                                  (रामचरितमानस, अरण्यकाण्ड)

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में भी नवधा भक्ति का उल्लेख हुआ है | इसमें अरण्यकाण्ड में प्रभु श्री राम ने शबरी के प्रति भक्ति के इन नौ अंगों अर्थात नवधा भक्ति का उल्लेख किया है | इस प्रकार दी गई नवधा भक्ति का विधिपूर्वक अनुष्ठान और हवन करने से मनुष्य को परमपद की प्राप्ति होती है, और सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है |

Monday, October 10, 2016

श्री श्री दामोदराष्टकं Sri Sri Damodarasthakam

नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं
लसत्-कुण्डलं गोकुले भ्राजमनम्
यशोदा-भियोलूखलाद् धावमानं
परामृष्टम् अत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥
 

रुदन्तं मुहुर् नेत्र-युग्मं मृजन्तम्
कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्
मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठ
स्थित-ग्रैवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ २॥

इतीदृक् स्व-लीलाभिर् आनन्द-कुण्डे
स्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्
तदीयेषित-ज्ञेषु भक्तैर् जितत्वं
पुनः प्रेमतस् तं शतावृत्ति वन्दे ॥ ३॥

वरं देव मोक्षं न मोक्षावधिं वा
न चन्यं वृणे ‘हं वरेषाद् अपीह
इदं ते वपुर् नाथ गोपाल-बालं
सदा मे मनस्य् आविरास्तां किम् अन्यैः॥ ४॥

इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैर्
वृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश् च गोप्या
मुहुश् चुम्बितं बिम्ब-रक्ताधरं मे
मनस्य् आविरास्ताम् अलं लक्ष-लाभैः॥५॥

नमो देव दामोदरानन्त विष्णो
प्रसीद प्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्
कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानु
गृहाणेष माम् अज्ञम् एध्य् अक्षि-दृश्यः ॥ ६॥

कुवेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्
त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ च
तथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ
न मोक्षे ग्रहो मे ‘स्ति दामोदरेह ॥ ७॥

नमस् ते ‘स्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्ने
त्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्ने
नमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायै
नमो ‘नन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥

Monday, September 26, 2016

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा Radha Dhund Rahi Kisi Ne Mera Shyam Dekha

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा 

राधा तेरा श्याम हमने वंसीवट पे देखा,
बंसी बजाते हुए, राधा तेरा श्याम देखा 

राधा तेरा श्याम हमने वृन्दावन में देखा
रास रचाते हुए राधा तेरा श्याम देखा 

राधा तेरा श्याम हमने गोकुल में देखा-देखा
गइया चराते हुए राधा तेरा श्याम देखा 

राधा तेरा श्याम हमने मथुरा में देखा
मुरली बजाते हुए राधा तेरा श्याम देखा 

राधा तेरा श्याम हमने सर्वगत में देखा
पर्वत उठाते हुए राधा तेरा श्याम देखा

श्री राधा चालीसा Shri Radha Chalisha

॥ दोहा ॥

श्री राधे वुषभानुजा , भक्तनि प्राणाधार ।
वृन्दाविपिन विहारिणी , प्रानावौ बारम्बार ॥
जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।
चरण शरण निज दीजिये सुन्दर सुखद ललाम ॥

॥ चौपाई ॥

जय वृषभानु कुँवरी श्री श्यामा, कीरति नंदिनी शोभा धामा ।
नित्य बिहारिनी रस विस्तारिणी, अमित मोद मंगल दातारा ॥

राम विलासिनी रस विस्तारिणी, सहचरी सुभग यूथ मन भावनी ।
करुणा सागर हिय उमंगिनी, ललितादिक सखियन की संगिनी ॥

दिनकर कन्या कुल विहारिनी, कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनी ।
नित्य श्याम तुमररौ गुण गावै,राधा राधा कही हरशावै ॥

मुरली में नित नाम उचारें, तुम कारण लीला वपु धारें ।
प्रेम स्वरूपिणी अति सुकुमारी, श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी ॥

नवल किशोरी अति छवि धामा, द्दुति लधु लगै कोटि रति कामा ।
गोरांगी शशि निंदक वंदना, सुभग चपल अनियारे नयना ॥

जावक युत युग पंकज चरना, नुपुर धुनी प्रीतम मन हरना ।
संतत सहचरी सेवा करहिं, महा मोद मंगल मन भरहीं ॥

रसिकन जीवन प्राण अधारा, राधा नाम सकल सुख सारा ।
अगम अगोचर नित्य स्वरूपा, ध्यान धरत निशिदिन ब्रज भूपा ॥

उपजेउ जासु अंश गुण खानी, कोटिन उमा राम ब्रह्मिनी ।
नित्य धाम गोलोक विहारिन , जन रक्षक दुःख दोष नसावनि ॥

शिव अज मुनि सनकादिक नारद, पार न पाँई शेष शारद ।
राधा शुभ गुण रूप उजारी, निरखि प्रसन होत बनवारी ॥

ब्रज जीवन धन राधा रानी, महिमा अमित न जाय बखानी ।
प्रीतम संग दे ई गलबाँही , बिहरत नित वृन्दावन माँहि ॥

राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा, एक रूप दोउ प्रीति अगाधा ।
श्री राधा मोहन मन हरनी, जन सुख दायक प्रफुलित बदनी ॥

कोटिक रूप धरे नंद नंदा, दर्श करन हित गोकुल चंदा ।
रास केलि करी तुहे रिझावें, मन करो जब अति दुःख पावें ॥

प्रफुलित होत दर्श जब पावें, विविध भांति नित विनय सुनावे ।
वृन्दारण्य विहारिनी श्यामा, नाम लेत पूरण सब कामा ॥

कोटिन यज्ञ तपस्या करहु, विविध नेम व्रतहिय में धरहु ।
तऊ न श्याम भक्तहिं अहनावें, जब लगी राधा नाम न गावें ॥

व्रिन्दाविपिन स्वामिनी राधा, लीला वपु तब अमित अगाधा ।
स्वयं कृष्ण पावै नहीं पारा, और तुम्हैं को जानन हारा ॥

श्री राधा रस प्रीति अभेदा, सादर गान करत नित वेदा ।
राधा त्यागी कृष्ण को भाजिहैं, ते सपनेहूं जग जलधि न तरिहैं ॥

कीरति हूँवारी लडिकी राधा, सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा ।
नाम अमंगल मूल नसावन, त्रिविध ताप हर हरी मनभावना ॥

राधा नाम परम सुखदाई, भजतहीं कृपा करहिं यदुराई ।
यशुमति नंदन पीछे फिरेहै, जी कोऊ राधा नाम सुमिरिहै ॥

रास विहारिनी श्यामा प्यारी, करहु कृपा बरसाने वारी ।
वृन्दावन है शरण तिहारी, जय जय जय वृषभानु दुलारी ॥

॥ दोहा ॥

श्री राधा सर्वेश्वरी , रसिकेश्वर धनश्याम ।
करहूँ निरंतर बास मै, श्री वृन्दावन धाम ॥

Tuesday, July 19, 2016

तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया Teri Bansi Pe Jaon Balihaar Rasiya

तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया।

ओड़ के आई मैं तो लाल चुनारिया,
मटकी उठा के मैं तो बन गयी गुजरिया।
मैं तो कर आई सोला श्रृंगार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

तेरे पीछे मैं तो आई अकेली,
बड़े गोप की नयी नवेली।
आई हूँ करने मनोहार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

जब से लगी है तेरी लगनवा,
बिसर गयो मोहे घर आंगनवा।
मैं तो छोड़ आई सारा संसार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

बिच बाजार मेरी बइयाँ न पकड़ो,
मान भी जाओ मुझे ऐसे न झटको 
लोग चुगली करेंगे सौ सौ बार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

ओड़ के आई मैं तो बजरंगी चुनरिया,
नाक में पहनी मैं प्यारी नथनिया।
मैं तो पायल की दूंगी झंकार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

सास लढ़े चाहे लढ़े जेठानी,
चाहे सजन करे मनमानी 
मैं तो आऊंगी जमुना के पार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

माखन मिश्री तुझको खिलाऊंगी,
नाच नाच के मैं तुझको रिझाऊँगी। 
तेरे सूरत पे जाऊं बलिहार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

तेरी मुरली पे, तेरी अखियन पे, तेरी चितवन पे, तेरी माला पे, 
तेरी पीताम्बर पे, तेरी लकुटिया पे, तेरी चरणन पे 
जाऊं बलिहार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया

Monday, March 14, 2016

जय राधे राधे गोविन्द, गोविन्द राधे Dikha Do Saawari Surat

जय राधे राधे गोविन्द , गोविन्द राधे -- ()
गोविन्द राधे , गोपाल राधे -- ()
जय राधे राधे गोविन्द , गोविन्द राधे -- ()

दिखा दो सांवरी सूरत , तो तेरी मेहेरबानी हे -- ()
तू ही तो दुनिया हे मेरी , तुम्ही से जिन्दगानी हे -- ()
दिखा दो सांवरी सूरत , तो तेरी मेहेरबानी हे 

खड़ी हूँ कबसे दरपे श्याम , तेरा दीदार पाने को -- ()
हुई बैचैन जाती हूँ , तुम्हे अपना बनाने को -- ()
तुम्हे अपना बना लूँ श्याम , यही बस दिल में ठानी हे -- ()
तू ही तो दुनिया हे मेरी , तुम्ही से जिन्दगानी हे 
दिखा दो सांवरी सूरत , तो तेरी मेहेरबानी हे 

ये हे फरियाद बेकश की , मेरे मालिक जरा सुनलो -- ()
में जानू प्रीत की में रीत , ये तुमने ही निभानी हे -- ()
तू ही तो दुनिया हे मेरी , तुम्ही से जिन्दगानी हे  
दिखा दो सांवरी सूरत , तो तेरी मेहेरबानी हे 

जय राधे राधे गोविन्द , गोविन्द राधे 
गोविन्द राधे , गोपाल राधे


Friday, August 7, 2015

एक राधा एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा Ek Radha Ek Mira DoNou Ne Shyam Kou Chaha

एक राधा एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा
अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो 
अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 
एक राधा एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा 
अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 

राधा  ने मधुबन में ढूंढा मीरा ने मन में पाया 
राधा जिसे खो बैठी वोह गोविन्द  मीरा हाथ बिकाया 
एक मुरली एक पायल एक पगली एक घायल 
अंतर क्या दोनों की प्रीत में बोलो 
अंतर क्या दोनों की प्रीत में बोलो 
एक सूरत  लुभानी एक म रत लुभानी
एक सूरत  लुभानी एक म रत लुभानी 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 

मीरा  के प्रभु गिरिधर  नागर राधा के मनमोहन 
मीरा  के प्रभु गिरिधर  नागर राधा के मनमोहन 
राधा नित  श्रंगार करे और मीरा बन गयी जोगन 
एक रानी एक दासी दोनों हरि  प्रेम की प्यासी 
अंतर क्या दोनों की तृप्ति  में बोलो 
अंतर क्या दोनों की तृप्ति  में बोलो 
एक जीत न माने एक हार न माने 
एक जीत  न माने एक हार न माने 

एक राधा एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा 
अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो 
अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी 
एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी


Sunday, August 2, 2015

सांवरिया ले चल परली पार Sanwariya le chal parli paar


सांवरिया ले चल परली पार 
जहाँ बिराजै राधा रानी 
अलबेली सरकार
सांवरिया ले चल परली पार  

गुण अबगुण सब तेरे अर्पण 
पाप पुन्य सब तेरे अर्पण 
बुद्धि सहित मन तेरे अर्पण 
ये जीवन भी तेरे अर्पण 
मैं तेरे चरणों की दासी 
मेरे प्राण आधार 
कन्हैया ले चल परली पार 
सांवरिया ले चल परली पार

तेरी आस लगा बैठी हूँ 
लज्या शील गवाँ बैठी हूँ 
ऑंखें खूब पका बैठी हूँ 
अपना आप लूटा बैठी हूँ   
सांवरिया मैं तेरी रागनी 
तू मेरा मल्हार 
कन्हैया ले चल परली पार 
सांवरिया ले चल परली पार

जग की कुछ परवाह नहीं हे 
अब कोई बाकी चाह नहीं हे 
चारों तरफ छाया अँधियारा 
सुजत कोई राह नहीं हे 
मेरे प्रियतम मेरे मांझी 
करदो बेड़ा पार 
कन्हैया ले चल परली पार 
सांवरिया ले चल परली पार

आनन्द घन यहाँ बरष रहा हे 
पता पता हरष रहा हे 
पि पि केह कोई तरस रहा हे 
हरी बेचारा तरश रहा हे 
बहुत हुए अब हार चुकी मैं 
मत छोड़ो मझधार 
कन्हैया ले चल परली पार 
सांवरिया ले चल परली पार

मेरा कोई ना , हाय मेरा कोई ना
मेरा कोई ना सहारा बीन तेरे 
नन्दलाल साँवरिया मेरे 
गोपाल साँवरिया मेरे 
ये नन्दलाल साँवरिया मेरे 
मेरा कोई ना सहारा बीन तेरे 
नन्दलाल साँवरिया मेरे 
ये गोपाल साँवरिया मेरे 
ये नन्दलाल साँवरिया मेरे 

बोलो बांके बिहारी लाल की जय 
जय जय श्री राधे (3)
Sanwariya le chal parli paar
Jaha viraje radha rani
Albeli sarkar
Sanwariya le chal parli paar



Gun aavgun sab tere arpan
Pap punyaa sab tere arpan
Budhhi sahit mann tere arpan
Ye jeevan bhi tere aarpan
Main tere charnan ki dasi
Mere pran aadhar
Kanihya le chal parli paar
Sanwariya le chal parli paar
 

Teri aas laga baithi hu
Lajja sheel gava baithi hu
Aankhe khoob paka baithi hu
Apna aaap luta baithi hu
Sanwariya..sanwariya..sanwariya
Sanwariya mai teri raagni
Tu mera mallhaar
Kanihya le chal parli paar
Sanwariya le chal parli paar

 Jag ki kuchh parvaah nahi hai
Ab koi baaki chaah nahi hai
Chaaro taraf chhaya andhiyaara
Sujat koi raah nahi hai
Mere priyatam mere manjhi
Kardo beda paar
Naiyya le chal parli paar
Sanwariya le chal parli paar
Kanihya le chal parli paar

Aanand ghan yaha barash raha hai
Patta patta harsh raha hai
Pe pe ke koi tarsh raha hai
Hari bechara tarash raha hai
Bahut hue ab haar chuki mai
Matt chhodo majhdhaar
Naiyya le chal parli paar
Matt chhodo majhdhaar
Naiyya le chal parli paar
Sanwariya le chal parli paar

 Mera Koi Na, Haye Mera Koi Na
Mera Koi Na Sahara Bin Tere
Nandalal Sanwaria Mere
Gopal Sanwaria Mere
Ye Nandalal Sanwaria Mere
Mera Koi Na Sahara Bin Tere
Nandalal Sanwaria Mere
Ye Gopal Sanwariya Mere
Ye Nandalal Sanwariya mere

Bolo Banke Bihari Lal Ki Jai
Jai Jai Sri Radhe (3)